ऐ मेरे मन ! कर ले प्रभु का भजन
ऐ मेरे मन ! कर ले प्रभु का भजन
निर्झर बरसेगी सुख की बदरिया
चलते जाना आनन्द की डगरिया
होऽ चलते जाना आनन्द की डगरिया
मात-पिता पुत्र बन्धु ना नाती
ढूँढा बहुत ना मिला सच्चा साथी
स्वार्थ रहे तो वह मुझको बुलाये
तुझ निस्वार्थी की जानी कदरिया
होऽ चलते जाना आनन्द की डगरिया
हृदय की गुहा में विराजते ईश्वर
होकर भी ना देख पाए तू भीतर
कब से लगा मोह-माया में मन
इसके पीछे हुई जिन्द बावरिया
होऽ चलते जाना आनन्द की डगरिया
स्वर मेरे कातर हैं मन मेरा व्याकुल
प्यासा हूँ तेरे दरस को हूँ आतुर
तरसा है मन तेरे बिन भगवन्
ज्यूं तरसती है जल बिन मछरिया
होऽ चलते जाना आनन्द की डगरिया
वेदों की बंसी की धुन में रमा हूँ
तब से प्रभु तुझको सुनने लगा हूँ
जीवन के पनघट पे छलकेगी कब
वेद-ज्ञान की अमृत गगरिया
होऽ चलते जाना आनन्द की डगरिया
हृदय में अपने बिछाया है आसन
आओ विराजो प्रभु मनभावन
भक्ति सजाए तन मन को भुलाए
बैठूँ चरणों में सारी उमरिया
होऽ चलते जाना आनन्द की डगरिया
ऐ मेरे मन ! कर ले प्रभु का भजन
निर्झर बरसेगी सुख की बदरिया
चलते जाना आनन्द की डगरिया
होऽ चलते जाना आनन्द की डगरिया










