आत्मा अपनी अमर,अग्नि जला सकती नहीं।
आत्मा अपनी अमर,
अग्नि जला सकती नहीं।
शीश कट सकता है, लेकिन,
गर्दन झुक सकती नहीं।।
आँधी और तूफानों में,
सीखा कभी रुकना नहीं।
अन्यायीयों के सामने,
सीखा कभी झुकना नहीं।।
भगवान् ने भेजा है,
धर्म पर मरने के लिए।
आज हम तैयार है,
वो काम करने के लिए ।।










