आगे बढ़ इन्सां ज्ञान की गोद में
आगे बढ़ इन्सां ज्ञान की गोद में,
ज्ञान कर्म योग में।
क्या रहा बाकी
दुनियावी भोग में। टेक ।।
ज्ञान कर्म योग इक
साथ जिएं हम,
ओऽम् जिएं हम जीवन
सोम पिएं हम।
हर श्वास व्यस्तता
ब्रह्म के मोद में ।। १ ।।
साधना के गीतों से
जीवन हो हरा भरा,
भाव हो खरा यहां
व्यवहार हो खरा खरा ।।
हर कदम ऊंचाइयां
शिशुवत ताजे जोश में ।। २ ।।
जस-तस समझ कठिन,
जैसन-तैसन ही समझ।
बाकी सब असमझ,
असमझ अनेक,
समझ है एक।
अनेक एकं गम,
अगाओ थम् ।। ७ ।।
अन्त्र-मन कोषीय मानस,
बहुकोष सुप्त कुछ कोष
जागृत आदमी छोटा,
बहुकोष जागृत कुछ कोष
सुप्त आदमी बड़ा।
सर्व कोष जागृत आदमी पूर्णतम,
अगाओ थम् ।। ८ ।।
हिन्दू मुस्लिम ईसाई
साम्यवादी आदि छोटे घेरे।
चीनी भारतीय पाकिस्तानी
ईरानी आदि कुछ बड़े घेरे।
धरतीवासी अर्ध-उदात्त,
ब्रह्माण्डवासी उदात्तता।
उदात्तता धार, आदमी बन,
अगाओ थम् ।। ६ ।।










