आ प्यारे प्रभु, आ मेरे मन के द्वार
तू कर दे भवसागर से पार………. प्यारे अविनाशी ॥
कितने लगे जन्मों के फेरे मिट ना सके ये मन के अन्धेरे
दुःख पीड़ा आ आ कर घेरे…….आ प्यारे….
काम क्रोध मद मोह लुटेरे, मुझको रूलाए खुदये हँसे रे
ये मेरे जीवन को बिखेरे….ओ….आ प्यारे….
चारों ओर हैं पाप घनेरे, नां दर्शन करने दें तेरे
तुम्हीं बचाओ हे प्रभु मेरे…ओ…आ प्यारे…
दीन हूँ दीनानाथ हो मेरे, दान में दे दे दर्शन तेरे
क्यूँ भूले मुझको प्रभु मेरे…ओ….आ प्यारे…
श्रद्धा प्रेम हो मन में मेरे ओर वाणी में गीत हों तेरे
मैं सिमरूँ तुझे साँझ सवेरे…ओ….आ प्यारे….
ज्योतिस्वरूप हो प्रभु तुम मेरे, ज्ञान जगा अन्तर्मन मेरे
रहे आत्मा अर्पण तेरे…. ओ…आ प्यारे…
ये मन अब तुझको ही हेरे, दर्शन कब होंगे प्रभु तेरे ?
दिन आएँगे मिलन के सुनहरे….ओ…ओ प्यारे…
(घनेरे) बहुत
तर्ज: आजा रे परदेसी










