धन्य वही परिवार है, जिसमें सद्व्यवहार है।
धन्य वही परिवार है,
जिसमें सद्व्यवहार है।
घर में ही फिर स्वर्ग सा,
सच्चा सौख्य अपार है।। टेक ।।
पिता पुत्र भाई-भाई सब,
आपस में मिल रहते हैं।
प्रीति प्रतीति हृदय में रखते,
कड़वे वचन न कहते हैं।
पिता पुत्र को प्यार करे,
पुत्र परम सत्कार करे।
आत्मीयता एकता,
जीवन का आधार है। ।।1।।
धन्य वही परिवार है जिसमें……..
बड़ा भ्रात छोटे भ्राता को,
सदा बराबर का जाने।
छोटा भी निज बड़े भ्रात को,
पूज्य जान आज्ञा माने।
अगर कोई कुछ कह देवे,
दूजा उसको सह लेवे।
सच जानो संसार में,
सहनशीलता ही सार है।।2।।
धन्य वही परिवार है जिसमें……
सास-बहू, ज्येष्ठा देवरानी,
जितनी भी है महिलाएँ।
बोलें ऐसे बैन बज रही हों,
मानो मृदु वीणाएँ।
ना झगड़ा, उत्पात करें कभी,
न ओछी बात करें।
वहाँ शांत वातावरण,
जहाँ न द्वेष विकार है।।3।।
धन्य वही परिवार है जिसमें…….
सास बहू को समझे पुत्री,
बहू सास जी की माता।
जेठानी-देवरानी में हो,
सगी बहिन का सा नाता।
सद्गुण वाली देवियाँ,
कहलाती हैं लक्ष्मियाँ।
गृहस्थ के उद्धार का,
इन पर पूरा भार है।।4।।
धन्य वही परिवार है जिसमें…….
पत्नी पति को देव,
और पति समझे देवी पत्नी को।
कभी भूल से भी ना दुखाते,
जीवन संगिनी के जी को।
पत्नी भी न दुःखी रखे,
पति के प्रति सद्भाव रखे।
दोनों में यदि मेल है,
जीवन नैय्या पार है।।5।।
धन्य वही परिवार है जिसमें…….
जहाँ सुशिक्षित सभ्य बड़े हों,
सभ्य बच्चे होते है।
जाति सुधारक धर्म प्रचारक,
देशभक्त सच्चे होते हैं।
नहीं सिनेमा की लत है,
डाली अच्छी आदत है।
जीवन उसका सात्विकी,
जिसका उच्च विचार है। ।6।।
धन्य वही परिवार है जिसमें……….
सत्पुरुषों का आदर,
सन्ध्या अग्निहोत्र सत्संग करें।
एक ईश आराधना,
यम नियमों की साधना करें।।
सहित मन ‘लालमन’
स्वर्णिम फिर संसार है।।7।।
धन्य वही परिवार है जिसमें……….










