कही किसने आकर के हमको जगाया

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कही किसने आकर के हमको जगाया,

कही किसने आकर के हमको जगाया,
दयानन्द आया, दयानन्द आया।।1।।

लुटेरों से आकर किसने बचाया,
दयानन्द आया, दयानन्द आया।।2।।

अनाथों का कोई ठिकाना नहीं था,
बिलखते थे बच्चे खाना नहीं था।

कहो किसने अनाथालय खुलवाया,
दयानन्द आया, दयानन्द आया।।3।।

थे नारी को पैरों की जूती बताते,
नहीं कोई नारी को विद्या पढ़ाते।

कहो इनको अधिकार किसने दिलाया,
दयानन्द आया, दयानन्द आया।।4।।

अछूतों को ठुकराता सारा जमाना,
बड़ी भूल की थी समझकर बेगाना।

कहो इनको छाती से किसने लगाया,
दयानन्द आया, दयानन्द आया।।5।।

बन जाते थे हिन्दू, मुस्लिम इसाई,
उतारे जनेऊ, थी चोटी कटाई।

शुद्धि की बूटी को, किसने पिलाया,
दयानन्द आया, दयानन्द आया।।6।।

कहो वेद की बंसी, किसने बजायी,
धर्म हेतु मरने की, कला सिखाई।

कही जड़ की पूजा को, किसने छुड़ाया,
दयानन्द आया, दयानन्द आया।।7।।