जैसा तुम कर्म कमाओगे, वैसा ही फल तुम पाओगे।

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जैसा तुम कर्म कमाओगे, वैसा ही फल तुम पाओगे।

जैसा तुम कर्म कमाओगे,
वैसा ही फल तुम पाओगे।
सुख दोगे तो सुख पाओगे,
दुःख दोगे कष्ट उठाओगे। ।1।

यह जग कमर्मों की खेती है,
जो बीजोगे सो काटोगे।
बदनाम करेगी बदी तुम्हें,
कर नेकी यश फैलाओगे।।2।

गर किसी का पैसा मारोगे,
कुछ दिन तो कटेगी ऐश बड़ी
फिर बीज बनेगा वृक्ष जभी,
फिर रोओगे पछताओगे। ।3।

छल झूठ कपट चतुराई से,
सोने की बना लोगे लंका।
फिर याद रखो रावण की तरह,
कौड़ी भी न साथ ले जाओगे।।4।।

मनुष्य के चोले को पाकर,
कुछ नेक कमाई न की तूने।
फिर करके लाख चौरासी में,
जन्मों तक धक्के खाओगे।।5।।

सुविचार

इस दुनियां में बिना स्वार्थ के प्यार सिर्फ माँ ही कर सकती है।