जन्म-जन्म के चक्कर खाकर, हीरा जीवन मिलता है।
जन्म-जन्म के चक्कर खाकर,
हीरा जीवन मिलता है।
शुभ कर्मों के फल स्वरूप,
यह फूल चमन में खिलता है।
शुभ कर्मों के फलस्वरूप, यह……..
अजर, अजन्मा, अमर जीव का,
नर तन उत्तम चोला है।
उपलब्धि का आज तलक नहीं,
भेद किसी ने खोला है।
न तो कहीं यह मोल बिके,
और न दरजी से सिलता है।
शुभ कर्मों के फलस्वरूप, यह…….
सृष्टि के अनमोल पदार्थ,
जो भगवान् बनाता है।
वहीं कुशल कारीगर ही,
इस चोले का निर्माता है।
जिसकी मर्जी बिना जगत् में,
पत्ता तक नहीं हिलता है।
शुभ कर्मों के फलस्वरूप, यह……..
कुन्दन बनता है सोना,
जब इसको आग तपाती है।
छेनी से छिल कर हीरे की,
चमक और बढ़ जाती है।
प्रभु मिले तो हँस कर झेलो,
जितना संकट झिलता है।
शुभ कर्मों के फलस्वरूप, यह…….
सदा जवानी नहीं रहेगी,
ले शुभ कर्म कमा प्यारे।
तन के पुर्जे ढीले होंगे,
समय न व्यर्थ गँवा प्यारे।
‘पथिक’ आखिरी पहर में जीवन,
ठेले से नहीं मिलता है।
शुभ कर्मों के फलस्वरूप, यह ………..










