मेरे दाता के दरबार में, सब लोगों का खाता।

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मेरे दाता के दरबार में, सब लोगों का खाता।

मेरे दाता के दरबार में,
सब लोगों का खाता।
जो कोई जैसी करनी करता,
वैसा ही फल पाता।।
मेरे दाता के दरबार में, सब…..

क्या साधु, क्या सन्त, गृहस्थी,
क्या राजा क्या रानी,
प्रभु की पुस्तक में लिखी है,
सब की कर्म कहानी।
अन्तर्यामी अन्दर बैठा,
सब का हिसाब लगाता ।।1।।
मेरे दाता के दरबार में, सब……

बड़े-बड़े कानून प्रभु के,
बड़ी-बड़ी मर्यादा,
किसी को कौड़ी कम नहीं मिलती,
मिले न पाई ज्यादा।
इसीलिए वह दुनिया का,
जगत् पति कहलाता।।2।।
मेरे दाता के दरबार में, सब……

चले न उस के आगे रिश्वत,
चले नहीं चालाकी,
उस की लेन देन की बन्दे,
रीति बड़ी है बांकी
समझदार तो चुप है रहता,
मूरख शोर मचाता।।3।।
मेरे दाता के दरबार में, सब…….

उजली करनी कर ले बन्दे,
कर्म न करयो काला,
लाख आँख से देख रहा है,
तुझे देखने वाला।
उसकी तेज नजर से बन्दे,
कोई नहीं बच पाता।।4।।
मेरे दाता के दरबार में, सब…….