दुनिया की हर वस्तु भगवन्, तेरी याद दिलाती है।

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दुनिया की हर वस्तु भगवन्, तेरी याद दिलाती है।

दुनिया की हर वस्तु भगवन्,
तेरी याद दिलाती है।
पत्ता-पत्ता, डाली-डाली,
तेरे ही गुण गाती है।
सुन्दर है तेरी यह माया,
पृथ्वी सूरज चाँद बनाया।
पी-पी करे पपीहा,
कोयल सुन्दर राग सुनाती है।।
पत्ता-पत्ता, डाली-डाली तेरे ही……

ऋषियों-मुनियों ने है ध्याया,
मन-मन्दिर में तुझको पाया।
जरें-जरें में आप समाया,
ऋतु यही बतलाती है।।
पत्ता-पत्ता, डाली-डाली तेरे ही……

रंग-बिरंगे फूल खिलाये,
नदियाँ नाले खूब चलाये ।
हाथों बिना पहाड़ बनाये,
समझ नहीं कुछ आती है।
पत्ता-पत्ता, डाली-डाली तेरे ही….

दुनिया है सुन्दर फुलवारी,
फूल हैं जिसमें सब नर-नारी।
देख के रचना जनता सारी,
जय-जयकार मनाती है।।
पत्ता-पत्ता, डाली-डाली तेरे ही …….

नदियों में सब जल ही जल है,
बागों में सब फल ही फल हैं।
जंगल में सब हरियावल है,
बदली मेह बरसाती है।।
पत्ता-पत्ता, डाली-डाली तेरे ही……..

आत्मा अपनी शुद्ध बनायें,
वेद ज्ञान से लाभ उठायें।
मन-मन्दिर से ‘नन्दलाल’,
आवाज यही अब आये।।
दुनिया की हर वस्तु भगवन्
तेरी याद दिलाती है।
पत्ता-पत्ता, डाली-डाली, तेरे ही……..