प्रेमी भरकर प्रेम में, ईश्वर के गुण गाया कर।

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शिक्षा

प्रेमी भरकर प्रेम में,
ईश्वर के गुण गाया कर।
मन-मन्दिर में गाफिला,
झाडू रोज़ लगाया कर।।
प्रेमी भरकर प्रेम में, ईश्वर…….

सोने में तो रात गुजारी,
दिन-भर करता पाप रहा,
इसी तरह बरबाद तू बंदे,
करता अपना आप रहा,
प्रातः समय उठ ध्यान से,
सत्संग में तू जाया कर ।।
प्रेमी भरकर प्रेम में, ईश्वर…….

नर तन के चोले का पाना,
बच्चों का कोई खेल नहीं,
जन्म-जन्म के शुभ कर्मों का होता
जब तक मेल नहीं,
नर तन पाने के लिए,
उत्तम कर्म कमाया कर।
प्रेमी भरकर प्रेम में, ईश्वर…….

पास तेरे है दुखिया कोई,
तूने मौज उड़ाई क्या ?
भूखा प्यासा पड़ा पड़ोसी,
तूने रोटी खाई क्या ?
पहले सबसे पूछकर,
फिर तू भोजन खाया कर।।
प्रेमी भरकर प्रेम में, ईश्वर ……..

देख दया उस परमेश्वर की,
वेद का जिसने ज्ञान दिया,
‘देश’ तू मन में सोच जरा तो,
कितना है कल्याण किया ?
सब कामों को छोड़कर,
ईश्वर को तू ध्याया कर।।
प्रेमी भरकर प्रेम में, ईश्वर…….