तू कर बन्दगी और भजन धीरे-धीरे, मिलेगी प्रभु की शरण धीरे-धीरे ।।

0
290

शिक्षा

तू कर बन्दगी और भजन धीरे-धीरे।
मिलेगी प्रभु की शरण धीरे-धीरे ।।
दमन इन्द्रियों का तू करता चला जा,
फिर काबू में आएगा मन धीरे-धीरे।।
तू कर बन्दगी और भजन……..

सुनें कान तेरे सदा सन्त वाणी,
तू कर वेद वाणी का मनन धीरे-धीरे ।।
तू कर बन्दगी और भजन……..

सफर अपना आसान करता चला जा,
छूटेगा यह आवागमन धीरे-धीरे।।
तू कर बन्दगी और भजन………

तू दुनियाँ में शुभ काम करता चला जा,
तू कर शुद्ध अपना चलन धीरे-धीरे।।
तू कर बन्दगी और भजन……….

सुविचार

न रिष्यत्त्वातः सखा।
हे सोम ! तेरा सखा कभी दुःखी नहीं होता।