आस्था
डूबतों को बचा लेने वाले,
मेरी नैया है तेरे हवाले।
लाख अपनों को मैंने पुकारा,
सबके सब कर गए हैं किनारा।
और देता न कोई दिखाई,
सिर्फ तेरा ही अब तो सहारा।
कौन तुझ बिन भँवर से निकाले।
मेरी नैया है तेरे हवाले।
जिस समय तू बचाने पे आए,
आग में भी बचा कर दिखाए।
जिस पर तेरी दया दृष्टि होवे,
उसपे कैसे कहीं आँच आए।
आँधियों में भी तू ही सँभाले।
मेरी नैया है तेरे हवाले।
पृथ्वी सागर व पर्वत बनाए,
तूने धरती पे दरिया बहाए।
चाँद सूरज करोड़ों सितारे,
फूल आकाश में भी खिलाए।
तेरे सब काम जग से निराले।
मेरी नैया है तेरे हवाले।
बिन तेरे चैन मिलता नहीं है,
फूल आशा का खिलता नहीं है।
तेरी मर्जी बिना तो जहाँ में,
‘पथिक’ पत्ता भी हिलता नहीं है।
तेरे वश में अंधेरे उजाले ।।
मेरी नैया है तेरे हवाले।










