खुशियों का ग्राम है, सच्चा सुखधाम है।

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ओ३म् महिमा

खुशियों का ग्राम है, सच्चा सुखधाम है।
दुनियाँ में सब से प्यारा, ईश्वर का नाम है।।

वेदों ने गाया है, ऋषियों ने ध्याया है।
सुमिरन परमात्मा का, हर दिल को भाया है।
नर तन का चौला पाया, सुन्दर ईनाम है।।
दुनियाँ में सब से प्यारा……..

प्राणों का प्राण है, वह शक्तिमान है।
संकट की घड़ियों में भी, रक्षक भगवान है।
उसकी भक्ति में डूबी, हर सुबहो-शाम है।।
दुनियाँ में सब से प्यारा.…………

बादल घनघोर है, मनवा कमजोर है।
रस्ता भटकाने वाले, लोगों का शोर है।
ईश्वर का चिन्तन मन को, देता आराम है।।
दुनियाँ में सब से प्यारा…….

सच्चा दरबार है, सच्ची सरकार है।
सुख-दुःख फल पाने वाला, सारा संसार है।
अच्छे व्यवहार का ही, अच्छा परिणाम है।।
दुनियाँ में सब से प्यारा……..

पहले तुम जान लो, उसको पहचान लो।
फिर उसकी भक्ति करना, जीवन में ठान लो।
ऋषियों-मुनियों का सब को, यह ही पैगाम है।।
दुनियाँ में सब से प्यारा…….

निकले जो राह में, मंजिल की चाह में।
गड़बड़ न होने पाये, जिनके उत्साह में।
‘पथिक’ ना मेहनत उनकी, होती नाकाम है।।
दुनियाँ में सब से प्यारा…….