दादा मालदेव मंदिर के प्रांगण में किया जा रहा विशाल महायज्ञ का आयोजन

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दादा मालदेव मंदिर के प्रांगण में किया जा रहा विशाल महायज्ञ का आयोजन

निमंत्रण पत्र

सभी धर्म प्रेमी सज्जनों से निवेदन है। अपने धर्म के बारे में ठीक ठीक जाने और विधि पूर्वक अपने त्योहारों को मनाएं। देवियों और सज्जनों दीपावली हमारे देश का सबसे बड़ा त्यौहार है और इसमें लक्ष्मी पूजन का विधान है लक्ष्मी पूजन का शास्त्रीय स्वरूप क्या है? कृषि के द्वारा धान की नई फसल के रूप में जोन नया धन अन्न के रूप में प्राप्त होता है वह लक्ष्मी रूप होता है उस लक्ष्मी रूप का पहला भाग देवों को अर्पित किया जाता है। इस अनुष्ठान में वेद मंत्रों के द्वारा विधि पूर्वक उत्तम रीति से अग्नि में डाली हुई आहुति सूर्य किरणों को प्राप्त होती है। इसी सूर्य की किरणों से उत्तम वृष्टि होती है उत्तम वृष्टि से उत्तम अन्न, उत्तम अन्न से उत्तम संतान का निर्माण होता है। इस यज्ञीय अग्नि को हमारे ऋषियों ने देवताओं का मुख कहा है अर्थात अग्नि में जो आहुति देते हैं वह संपूर्ण देव को प्राप्त होती है अर्थात वायु आकाश जल पृथ्वी आदि में इसी से दिव्यता का संचार होता है। इसी कारण प्राचीन काल से हमारे ऋषि मनीषी अपने आहार और व्यवहार को शुद्ध और पवित्र करने के लिए दैनिक जीवन व सभी पर्वो पर संयुक्त रूप से बड़े बड़े यज्ञों का अनुष्ठान करते थे।

दीपावली का महापर्व कार्तिक मास की कृष्ण अमावस्या को आता है जिसमें नए धान के चावल की खीर बनाकर हवन करने का विधान है इसे नव सस्येष्टि यज्ञ कहा जाता है वेदों में यज्ञ की विस्तृत महिमा है’ अयं यज्ञों मुवनस्य नाभिः’ यज्ञों वै श्रेष्ठतमं कर्म आदि हमारी संस्कृति यज्ञीय संस्कृति है। जिसमें पूर्णिमा व अमावस्या को विशिष्ट यज्ञ होते रहे हैं जिन्हे शास्त्रों में दर्शपौर्णमास कहा जाता है पर्यावरण शुद्धि का प्रमुख कारण यज्ञ ही है अन्न मानव समाज का सबसे प्रमुख धन अर्थात लक्ष्मी है सभी प्रमुख फसलों के आगमन में अन्न के रूप में पूजा का विधान है चाहे वह वैशाखी वैशाखी हो होली हो या दीपावली हो जब हम पराधीनता के काल में यज्ञ नहीं कर पाए तब यज्ञ के स्थान पर काल्पनिक लक्ष्मी की भिन्न-भिन्न रीति से पूजा करने लगे। हजारों वर्षों के उपरांत ऋषिवर दयानंद जी ने हमें यज्ञ की महिमा से परिचित करवाया। जिससे घर-घर यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित होने लगी। इसी दीपावली के दिन सन 1884 को ऋषि दयानंद का बलिदान हो गया। जिससे हमारे संपूर्ण राष्ट्र व सनातन धर्म की महती हानि हुई। तथापि हम सभी का कर्तव्य है कि कृतज्ञता पूर्वक ऋषि दयानंद का स्मरण करते हुए उनके बताए वेद पथ पर बढ़ते हुए अपने सनातन संस्कृति को बढ़ाने वाले बनें। इस दीपावली महापर्व व ऋषि बलिदान दिवस पर गांव दरियापुर में दादा मालदेव मंदिर के प्रांगण में एक विशाल महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है

जिसमें 101 परिवारों द्वारा यज्ञीय अनुष्ठान किया जाएगा। जो धर्म प्रेमी परिवार इस आयोजन में सम्मिलित होंगे ईश्वर की न्याय व्यवस्था से पुन्य (सुख) के भागी होंगे।

नोटः एक परिवार में कम से कम 4 सदस्य जरूर रहे। पंजीकरण एक सप्ताह पहले तक अवश्य करवा लें। इस कार्यक्रम का मार्गदर्शन वेद के विद्वान आर्य महासंघ के अध्यक्ष आर्ष गुरुकुल टटेसर जौंती के प्राचार्य आचार्य हनुमंत प्रसाद उपाध्याय जी और गुरुकुल के ब्रह्मचारियों के निर्देशन में रहेगा।

विशेष आकर्षण कक्षा 6 से कक्षा 10 तक लड़कों की 100 मीटर दौड सांयः 4 बजे बुधवार 30 अक्टूबर, 2024 को दादा मालदेव स्टेडियम, दरियापुर कलां, दिल्ली में होगी।