महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी) के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोज्यमान द्वि-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी

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महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर

महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200वीं जयन्ती के पावन उपलक्ष्य में महर्षि दयानन्द शोध पीठ तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी) के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोज्यमान द्वि-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी

“वैदिक ज्ञान परम्परा और महर्षि दयानन्द सरस्वती”

दिनांक : 09 एवं 10 नवम्बर 2024 (कार्तिक शुक्ला अष्टमी एवं नवमी, विक्रम संवत् 2081)

आयोजन-स्थल स्वराज सभागार, बृहस्पति भवन

संरक्षक – प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ल (कुलपति)

संयोजक – प्रोफेसर नरेश कुमार धीमान् (चेयर प्रोफेसर)

आयोजन सचिव- प्रोफेसर ऋतु माथुर (निदेशक, महर्षि दयानन्द शोधपीठ)

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर (राजस्थान) भारत

ईमेल: dayanandpeethmdsu@gmail.com

आमन्त्रित विद्वान्:-

  1. डॉ. सुरेन्द्र कुमार (पूर्व कुलपति, गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार)
  2. माननीय मुनि सत्यजित्, अध्यक्ष वानप्रस्थ साधक आश्रम, रोजड़ (गुजरात)
  3. प्रो. रूप किशोर (पूर्व कुलपति, गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार)
  4. प्रो० रवि प्रकाश आर्य, चेयर प्रोफेसर, महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी) महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक
  5. प्रो. सुधीर कुमार, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, दिल्ली 6. प्रो. वीरेन्द्र कुमार अलंकार, पंजाच विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़
  6. प्रो. ब्रह्मदेव विद्यालंकार, गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार
  7. डॉ. रामचन्द्र, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
  8. डॉ. मोक्षराज जी, पूर्व सांस्कृतिक राजनयिक, भारत सरकार
  9. डॉ. विजयलक्ष्मी, सनातन धर्म महाविद्यालय, मुजफ्फरनगर
  10. डॉ. सुषमा अलंकार, डी.ए.वी. कॉलेज, चण्डीगढ़
  11. डॉ. आशुतोष पारीक, सम्राट् पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर
  12. श्री अंकित प्रभाकर, ऋषि उद्यान, अजमेर
  13. डॉ. रमेश गुप्ता, अमेरिका (वर्चुअल)
  14. डॉ. अमर सिंह शास्त्री, न्यूयार्क (वर्चुअल)
  15. डॉ. रामचन्द्र शास्त्री, अमेरिका (वर्चुअल)
  16. श्री विश्रुत आर्य, अटलांटा (वर्चुअल)

आयोजन समितिः-

  1. प्रोफेसर ऋतु माथुर, निदेशक महर्षि दयानन्द शोधपीठ
  2. प्रोफेसर नरेश कुमार धीमान्, चेयरप्रोफेसर, महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी)
  3. प्रोफेसर नीरज भार्गव, विभागाध्यक्ष, कम्प्यूटर एप्लीकेशन
  4. प्रोफेसर आशीष भटनागर, विभागाध्यक्ष एवं आचार्य, सूक्ष्मजीव विज्ञान

विभाग

  1. प्रोफेसर शिवदयाल सिंह, विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र
  2. प्रोफेसर शिवप्रसाद, विभागाध्यक्ष, प्रबन्ध अध्ययन विभाग
  3. प्रोफेसर रीटा मेहरा, विभागाध्यक्ष, विशुद्ध एवं अनुप्रयुक्त रसायन-शास्त्र विभाग
  4. प्रोफेसर सुब्रतो दत्ता, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान
  5. प्रोफेसर मोनिका भटनागर, आचार्या, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग
  6. प्रोफेसर सुभाष चंद्र, विभागाध्यक्ष, प्राणीशास्त्र विभाग
  7. प्रोफेसर अरविन्द पारीक, विभागाध्यक्ष, वनस्पतिशास्त्र विभाग
  8. प्रोफेसर भारती जैन
  9. डॉ. आशीष पारीक, सह-आचार्य, प्रबन्ध अध्ययन विभाग
  10. डॉ. दीपिका उपाध्याय, सह-आचार्य, प्रबन्ध-अध्ययन विभाग
  11. प्रोफेसर प्रवीण माथुर, पूर्व निदेशक, महर्षि दयानन्द शोधपीठ
  12. डॉ. आशुतोष पारीक, सह-आचार्य, सम्राट् पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर
  13. डॉ. आर. के. जैन, महर्षि दयानन्द शोधपीठ कार्यालय
  14. डॉ० स्वतन्त्र कुमार, महर्षि दयानन्द शोधपीठ कार्यालय

शैक्षिक नगरी अजमेर:-

अरावली की मनमोहक पहाड़ियों से आवृत्त राजस्थान के हृदयस्थल अजमेर को शैक्षिक नगरी के रूप में जाना जाता है। धार्मिक सद्भाव एवं सामाजिक समरसता के कारण इसकी अपनी पहचान है। महर्षि दयानन्द सरस्वती की निर्वाणस्थली होने के कारण आर्यजनों के लिए इसका विशिष्ट महत्त्व है। अजमेर के निकट ही पुष्कर में ब्रह्मा जी का मन्दिर है, जिस मन्दिर की एक कुटिया में निवास करते हुए महर्षि दयानन्द सरस्वती ने वेद-भाष्य का लेखन आरम्भ किया था। अजमेर में महर्षि दयानन्द की उत्तराधिकारिणी परोपकारिणी सभा के साथ वैदिक पुस्तकालय, वैदिक यन्त्रालय, भिनाय कोठी, निर्वाण स्थली मलूसर, ऋषि उद्यान तथा अनेक आर्यसमाज व दयानन्द एंग्लो वैदिक संस्थाएँ आदि ऐतिहासिक महत्त्व के स्थल एवं संस्थान हैं। इसी कारण अजमेर समस्त विश्व के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर:-

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर (राजस्थान) की स्थापना । अगस्त 1987 को राज्य सरकार द्वारा की गई। विश्वविद्यालय अपने परिसर के अतिरिक्त; अपने शैक्षणिक अधिकार में आनेवाले अजमेर (94), भीलवाड़ा (59), नागपुर (215) तथा टॉक (110) जिलों के कुल 578 संबद्ध महाविद्यालयों के शैक्षणिक तन्त्र का पर्यवेक्षण तथा इनमें प्रविष्ट विद्यार्थियों की पाठ्यक्रमानुसार परीक्षा लेने के उपरान्त उन्हें उपाधि-पत्र आदि प्रदान करने के उत्तरदायित्व का निर्वहन यह विश्वविद्यालय करता है। वर्तमान में यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।

महर्षि दयानन्द शोध पीठ तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी):-

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के अन्तर्गत महर्षि दयानन्द शोधपीठ की स्थापना दिनाङ्क 16.09.2016 को की गई। प्रोफेसर प्रवीण माथुर इसके संस्थापक निदेशक रहे। वर्तमान में प्रोफेसर ऋतु माथुर निदेशक के उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रही हैं। तात्कालिक निदेशक प्रो. प्रवीण माथुर ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली की योजना के अनुरूप विश्वविद्यालय में “महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर” की स्थापना के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत किया, जिसे स्वीकार करते हुए यूजीसी ने एतदर्थ स्वीकृति प्रदान कर दी। जिस पर 26 फरवरी, 2022 को दयानन्द-दर्शन के ख्यातिप्राप्त वैदिक विद्वान् प्रोफेसर नरेश कुमार धीमान् ने चेयर प्रोफेसर के रूप में विधिवत् अपना कार्यभार संभाला। इस चेयर के अन्तर्गत चेयर प्रोफेसर प्रो. नरेश कुमार धीमान् के निर्देशन में महर्षि दयानन्द सरस्वती के सैद्धान्तिक मन्तव्यों के अनुरूप वेदविषयक तथा उनके साहित्य से संबद्ध शोधकार्य निरन्तर चल रहे हैं।

संकल्पना:-

महर्षि दयानन्द सरस्वती के 200वीं जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में महर्षि दयानन्द शोध पीठ तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती चेयर (यूजीसी), महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर द्वारा दिनांक 09 एवं 10 नवम्बर 2024 को “वैदिक ज्ञान परम्परा और महर्षि दयानन्द सरस्वती विषयक द्विदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेद-संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी महर्षि दयानन्द के ‘वेदों की ओर लौटो’ एवं ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ के उद्घोष को रेखांकित करने का प्रयास करेगी। साथ ही वैदिक ज्ञान परम्परा के व्यापक तत्त्वविमर्श एवं वर्तमान समाज में वैदिकचिन्तन को स्थापित करने के सार्वभौमिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अग्रसर करने वाला होगा।

वर्तमान वैश्विक समाज में वैदिक ज्ञान परम्परा को मानवीय चिन्तन के मूलाधार के रूप में देखा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्यों में वैदिक सूत्रों की स्पष्ट छवि दिखाई देती है। वैदिक ज्ञान के सार्वभौमिक चिन्तन के कारण ऋग्वेद को वैश्विक धरोहर एवं वैदिक शान्ति पाठ को वैश्विक शान्ति मन्त्र के रूप में स्वीकार किया गया है। सम्पूर्ण विश्व के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चिन्तन में वैदिकज्ञान परम्परा के बीज विद्यमान हैं। पर्यावरण के प्रति सजगता एवं मानवीय मूल्यों के प्रति निष्ठा आर्ष चिन्तन का प्रमुख आधार रहे हैं। वेद-चतुष्टय भारत की आत्मा है और इसी से समस्त ज्ञान-विज्ञान की धाराएँ प्रवाहित होती हैं। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने भारत के पुनरुत्थान में वेदों की महत्ता को सर्वोपरि माना है और इसीलिए वे कहते हैं “वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढ़ना- पढ़ाना और सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है। अतः यह स्पष्ट है कि वैदिक ज्ञान ही सकल विश्व को सन्मार्ग की ओर प्रेरित कर सकता है। वैदिक ज्ञान-विज्ञान की अजस धारा का प्रवाह सर्वत्र व्यापकता से मानवता का पोषण करे, यह वर्तमान युग की पहली आवश्यकता है। वेद मानवता के पोषक, आध्यात्मिक, आधिदैविक, एवं आधिभौतिक समुन्नति के सूत्रधार हैं। अतः वेद का निदिध्यासन प्रत्येक मनुष्य के लिए परमावश्यक है। नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय संस्कृति, दर्शन और समृद्ध परम्परा के अध्ययन और अनुसन्धान की महती आवश्यकता पर बल देते हुए लिखा गया है- “भारतीय संस्कृति और दर्शन का विश्व में बड़ा प्रभाव रहा है। वैश्विक महत्त्व की इस समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए न सिर्फ सहेज कर संरक्षित रखने की आवश्यकता है; अपितु हमारी शिक्षा व्यवस्था द्वारा इस पर शोध कार्यों के माध्यम से इसे और अधिक समृद्ध किया जाना भी अपेक्षित है।”

इस शोधोपक्रम में वैदिक तत्त्वों के चिन्तन, मनन एवं अनुसन्धान के लिए आप तुल्य वेदादि विषयों के मर्मज्ञ विद्वानों की उपस्थिति एवं सहभागिता सादर प्रार्थनीय है।

महत्त्वपूर्ण तिथियाँ:-

पंजीकरण व शोधसारांश जमा कराने की अन्तिम तिथि: 20 अक्टूबर 2024 पूर्ण शोध आलेख प्रेषण की अन्तिम तिथि: 30 अक्टूबर 2024

संगोष्ठी की तिथियाँ: 09 एवं 10 नवम्बर 2024

आवश्यक दिशा-निर्देश:-

  • शोध सारांश एवं शोध आलेख संस्कृत, हिन्दी अथवा अंग्रेजी में हो सकते हैं, जिन्हें वर्ड तथा पीडीएफ दोनों ही प्रारूपों में गूगल फार्म के साथ ही संलग्न कर प्रेषित करना आवश्यक होगा। शोध सारांश जमा करवाने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर, 2024 होगी।
  • संस्कृत एवं हिन्दी के सारांश एवं आलेख यूनिकोड फोन्ट 14 प्वाइंट में ही प्रेषित करें। अंग्रेजी के सारांश एवं आलेख न्यू टाइम्स रोमन एरियल फोन्ट 12 प्वाइंट में भेजें।

शोध आलेख पूर्णतः मौलिक होना चाहिए। साथ ही पूर्व में प्रकाशितअथवा प्रकाशनार्थ प्रेषित अथवा किसी संगोष्ठी में प्रस्तुत न किया गया हो।

5 से 7 बीज शब्दों (Key words) के साथ शोध-सारांश के लिए शब्दसीमा 250 शब्द निर्धारित की गई है। शोध-समीक्षण समिति द्वारा चयनोपरान्त पत्रवाचन हेतु स्वीकृति की सूचना ईमेल पर प्रेषित की जाएगी। चयनित शोध सारांशों का प्रकाशन संगोष्ठी संक्षिप्तिका में किया जाएगा।

  • शोध सारांश स्वीकृति के उपरान्त पूर्ण शोध आलेख लगभग 3000 शब्दों में समुचित सन्दर्भ आदि के साथ निर्धारित तिथि (30 अक्टूबर, 2024) तक गूगल फार्म के साथ तथा ईमेल:-
    • (dayanandpeethmdsu@gmail.com) पर प्रेषित करें।

पंजीयन शुल्क

क्रमसंख्याश्रेणी आवास के बिनाआवास के साथ
1शिक्षक/आचार्य₹800/-₹1500/-
2शोधार्थी₹500/-₹1000/