महर्षि दयानन्द सरस्वती का 200 वां जन्मोत्सव एवं आर्य समाज रामपुरा, कोटा का 126 वां वार्षिकोत्सव
दिनांक 6, 7 व 8 सितम्बर 2024 शुक्रवार, शनिवार, रविवार
आयोजन स्थल : एस.जी. एन. गार्डन, बून्दी रोड, कोटा
समस्त सभासद आर्य समाज रामपुरा, कोटा (राज.)
महापुरुषों की दृष्टि में देव दयानन्द एवं आर्य समाज
स्वामी दयानन्द सरस्वती ने हिन्दु धर्म के सुधार का बड़ा कार्य किया और जहां तक समाज-सुधार का सम्बन्ध है, वह बड़े उदार हृदय थे। वे अपने विचारों को वेदों पर आधारित और उन्हें ऋषियों के ज्ञान पर अवलम्बित मानते थे। उन्होंने वेदों पर बड़े-बड़े भाष्य किये, जिससे मालूम होता है कि वे पूर्ण अभिक्ष थे।
-प्रो. एफ. मैक्समूलर
आर्य समाज समस्त संसार को वेदानुयायी बनाने का स्वप्न देखता है। स्वामी दयानन्द ने इसे जीवन ओर सिद्धान्त दिया। उनका विश्वास था कि आर्य जाति चुनी हुई, भारत चुना हुआ देश और वेद चुनी हुई धार्मिक पुस्तक है
-ब्रिटेन के (स्व.) प्रधानमंत्री रेग्जे मैक्डॉनल्ड
स्वामी दयानन्द सरस्वती उन महापुरूषों मे से थे, जिन्होंने आधुनिक भारत का निर्माण किया ओर जो उसके आचार-सम्बन्धी पुनरूत्थान तथा धार्मिक पुनरूद्धार के उत्तरदाता हैं, हिन्दु समाज का उद्धार करने में आर्यसमाज का बहुत बड़ा हाथ है। रामकृष्ण मिशन ने बंगाल में जो कुछ किया, उससे कहीं अधिक आर्य समाज ने पंजाब और संयुक्त प्रांत में किया। यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण न होगा कि पंजाब का प्रत्येक नेता आर्य समाजी है। स्वामी दयानन्द को मैं एक धार्मिक और समाज-सुधारक तथा कर्मयोगी मानता हूं, संगठन कार्यों के सामर्थ्य और प्रयास की दृष्टि से आर्य समाज अनुपम संस्था है।
-श्री सुभाष चन्द्र बोस
स्वामी दयानन्द मेरे गुरू हैं। मैनें संसार में केवल उन्हीं को गुरू माना है। वह मेरे धर्म के पिता हैं और आर्य समाज मेरी धर्म की माता है। मैं इन दोनों की गोद में पला। मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे गुरू ने मुझे स्वतंत्रतापुर्वक विचार करना, बोलना और कर्तव्य पालन करना सिखाया तथा मेरी माता ने मुझे एक संस्था में बद्ध होकर नियमानुवर्तिता का पाठ दिया।
-पंजाब केसरी लाला लाजपतराय
महर्षि दयानन्द भारत माता के उन प्रसिद्ध और उच्च आत्माओं में से थे, जिनका नाम संसार के इतिहास में सदैव चमकते हुए सितारों की तरह प्रकाशित रहेगा। वह भारत-माता के उन सपूतों में से हैं, जिनके व्यक्तित्व पर जितना भी अभिमान किया जाये थोड़ा है। नैपोलियन और सिकन्दर जैसे अनेक सम्राट एवं विजेता संसार में हो चुके हैं, परन्तु स्वामी दयानन्द उन सबसे बढ़कर हैं।
-खदीजा बेगम, एम.ए
यदि आप चाहते हैं……
सच्चे ईश्वर को जानना एवं उसको प्राप्त करना
आत्मिक एवं सामाजिक उन्नति करना
आत्मा, पुनर्जन्म, कर्मफल व्यवस्था को जानना
समाज में एकता स्थापित करना
छुआछूत, अंधविश्वास, पाखण्ड मिटाना
समस्त दुखों से छूटना एवं सुखों को प्राप्त करना
ईश्वर का सच्चा आनन्द प्राप्त करना
अपने परिवार में एकता, शांति, प्रेम आदि गुण विकसित करना
अपने वैदिक धर्म, वेदों, उपनिषदों, दर्शनों को जानना
श्रीराम, श्री कृष्ण, श्री हनुमान, सच्चे शिव के आदर्शों को समझना
धर्म से सम्बंधित अपनी सभी शंकाओं का वैज्ञानिक एवं तार्किक समाधान
सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापित करना
महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के समान
राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान देना
तो इस कार्यक्रम में अवश्य ही पधारें।

धर्म प्रेमी सज्जनों एवं देवीयों,
आपको यह जानकर अत्यन्त प्रसन्नता होगी कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के 200वें जन्मोत्सव एवं आर्य समाज रामपुरा कोटा के 126वें स्थापना दिवस (वार्षिकोत्सव) के उपलक्ष में विशाल महायज्ञ एवं वैदिक सत्संग का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आर्य जगत के विश्व प्रसिद्ध विद्वान स्वामी सुमेधानन्द जी सरस्वती (पूर्व सांसद सीकर) एवं आचार्य योगेश जी भारद्वाज, प्रसिद्ध भजनोपदेशक आचार्य कुलदीप जी, आचार्य बिरधी लाल जी (यज्ञ के ब्रह्मा) पधार रहे हैं।
आप इष्टमित्रों एवं परिवार सहित आयोजित सभी कार्यक्रमों में पधार कर धर्म लाभ प्राप्त करें ।










