दर्शन योग महाविद्यालय में नवीन प्रवेश सूचना

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नवीन प्रवेश सूचना

आध्यात्मिकता के अभाव में संसार में न हृदय को शांति मिलती है और न आत्मा को सन्तुष्टि, न स्वच्छ प्रीति, न सहानुभूति, न सहृदयता। अपितु उन्माद या स्वार्थपूर्ण विलाप प्राप्त होता है। व्यक्ति को यहाँ सुख से अधिक दुःख भोगना पड़ता है।

इसी समस्या के समाधान हेतु ऋषि-महर्षियों ने दर्शन शास्त्र की रचना की है। आत्मोद्धार के इच्छुक युवाओं! आइए उनका गहन अनुशीलन कर अपने जीवन को कृतार्थ करें।

एतदर्थ दर्शन योग महाविद्यालय आर्यवन रोजड़ में योग आदि पांच दर्शनों, उपनिषदों एवं वेद के कुछ चुने हुए अध्यायों का अध्ययन आरम्भ करें। प्रवेश लेकर अपनी बुद्धि का परिशोधन करें !!

प्रवेश हेतु योग्यता

  • • आयु-कम से कम १८ वर्ष।
  • शिक्षित-कम से कम १२ या समकक्ष।
  • व्याकरणाचार्य, शास्त्री या स्नातक को वरीयता।
  • प्रवेश केवल ब्रह्मचारियों के लिये।

दर्शन तथा योग विद्या का महत्त्व

स्वामी दयानन्द सरस्वती

हमारे भरत खण्ड देश से वेदों का बहुत सा धर्म लुप्त हो गया और रहा-सहा हम लोगों के प्रमाद से नष्ट होता जा रहा है और उसकी जगह पाखंड, अनाचार और दम्भ बढता जा रहा है। यदि कोई मुझसे पूछे कि इस पागलपन का कोई उपाय है या नहीं तो मेरा उत्तर यह है कि यद्यपि रोग बहुत बढा हुआ है तथापि इसका उपाय हो सकता है। वेद और दर्शनों की सी प्राचीन पुस्तकों के भिन्न-भिन्न भाषाओं में अनुवाद करके सब लोगों को जिससे अनायास प्राचीन विद्याओं का ज्ञान प्राप्त हो सके; ऐसा यत्न करना चाहिए और पढे-लिखे विद्वान् लोगों को सच्चे धर्म का उपदेश करने की तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए। उपदेश मंजरी पृ. ८९।

स्वामी सत्यपति परिव्राजक

ऋषि पद्धति से धार्मिक, योगी वैदिक विद्वानों का निर्माण और उनकी रक्षा आर्य समाज की उन्नति का कारण है। आर्य समाज को विशाल स्तर पर योजना बनाकर उसे व्यावहारिक स्वरूप देना चाहिए।

विशेषताएँ

क्रियात्मक योगप्रशिक्षण के माध्यम से विवेक वैराग्य, स्व-स्वामि- सम्बन्ध-ममत्व को हटाना, ईश्वर-प्रणिधान, मनोनियन्त्रण, यमनियम पालन, ध्यान, समाधि आदि विषयों का प्रशिक्षण दिया जाता है। आध्यात्मिक उन्नति हेतु प्रतिदिन कुछ काल मौन पालन भी कराया जाता है। प्रत्येक ब्रह्मचारी को विद्यालय में भोजन, वस्त्र, आवास घी दूध-फल, आसन, पुस्तक, चिकित्सा आदि की उत्तम निःशुल्क व्यवस्था है। दर्शन आदि अध्ययन के साथ प्रतिदिन प्रातः सायं उपासना, यज्ञ, वेदपाठ, वेदस्वाध्याय, आत्मनिरीक्षण आदि होते हैं।

स्वामी विवेकानंद परिव्राजक – निदेशक

स्वामी ब्रह्म विदानन्द सरस्वती – आचार्य

आचार्य दिनेश कुमार – व्यवस्थापक

स्वामी धुवदेव परिव्राजक – उपाचार्य

स्वामी वेदपति परिव्राजक – अध्यापक

संपर्क हेतु पता

दर्शन योग महाविद्यालय

आर्यवन, रोजड, पत्रा. सागपुर, ता. तलोद, जि. साबरकांठा, गुजरात- ३८३३०७

9409415011, 9409415017,

E-Mail:- darshanyog@gmail.com,

Web: www.darshanyog.org