वानप्रस्थ साधक आश्रम, रोजड ध्यान एवं अध्यात्म को समर्पित संस्थान
ध्यान प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर
१७ से २२ दिसम्बर २०२४
आज जन-जन में ध्यान के प्रति रुचि बढ़ रही है। जीवन की समस्याओं का समाधान ध्यान के द्वारा हो सकने के प्रति जनता आशान्वित हुई है। जनता ध्यान की सही विधि सीखना समझना चाहती है, ध्यान में आने वाली समस्याओं का समाधान व ध्यान के विषय में परामर्श चाहती है। ऐसे में ध्यान प्रशिक्षकों की आवश्यकता बढ़ गई है। इस कारण वानप्रस्थ साधक आश्रम, आर्यवन, रोजड़ (गुजरात) में आचार्य सत्यजित् जी आर्य के निर्देशन व मुख्य प्रशिक्षण में शिविर का आयोजन १७ से २२ दिसम्बर तक किया गया है। यदि आप ध्यान में रुचि रखते हों, साथ में ध्यान साधना करते भी हों और अन्यों को विधिवत् सिखाने का पुण्यकार्य करना चाहते हों, तो यह शिविर आपके लिए महत्वपूर्ण रहेगा। इस शिविर में वैदिक-आर्ष-पातञ्जल विधि से मूल-प्राचीन-शुद्ध ध्यान की विधि सिखाने का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जायेगा। ध्यान प्रशिक्षण के बाद प्रायोगिक परीक्षा होगी, सफल व योग्य शिविरार्थियों को ध्यान प्रशिक्षक’ का प्रमाण पत्र दिया जायेगा। ये ‘ध्यान प्रशिक्षक कहीं भी सत्संगों, धार्मिक आयोजनों, शिक्षण संस्थानों, चिकित्सालयों, वृद्धाश्रमों, अनाथालयों, कारागारों, शिविर आदि में ध्यान करा व सिखा सकेंगे।
नियम :-
१) मौन के समय मौन का पालन करना होगा।
२) कम से कम पूर्व में एक योग शिविर और एक ध्यान शिविर किया हो।
३) २५ से ५० वर्ष तक आयु वाले स्नातक (ग्रेजुएट) व्यक्तियों को शिविर में भाग लेने के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
४) शिविरार्थी अपने साथ नित्योपयोगी वस्तुए, औषधि, करदीपक (टॉर्च), पेन, नोटबुक आदि लायें। शिविर में प्रयोग हेतु सादे वरू (सफेद अथवा पीले) लाये। छोटे बच्चे, कीमती सामान, रेडियो, खाद्य सामग्री आबि अपने साथ न लावे। यदि कोई कीमती सामान, खाद्य सामग्री आदि साथ में हो तो शिविर से पूर्व कार्यालय में जमा कर देखें।
५) शिविरार्थियों को शिविर काल में चलभाष (मोबाईल) करने की अनुमति नहीं रहती है, चलभाष कार्यालय में जमा करवाना होता है। किसी को बहुत आवश्यक होगा तो स्वीकृति लेकर कार्यालय से फोन कर सकेंगे।
६) रोगी, अशक्त, वृध्द, धूम्रपान आदि व्यसनों वाले व्यक्ति कृपया शिविर में भाग लेने के लिए आवेदन न करें।
७) दूर से आने वाले शिविरार्थी अपना वापसी का रेलवे आरक्षण पूर्व ही करा लेवें।
८) शिविरार्थी सीमित २५ की संख्या में लिए जाएंगे तथा प्रथम आवेदकों को प्राथमिकता दी जाती है। पुरुष और महिलाओं की पृथक एवं सामूहिक आवास व्यवस्था रहती है।
६) शिविर शुल्क प्रति व्यक्ति २०००/- रुपये है, जिसे आवेदन के साथ पहले ही जमा करना होता है। स्थानाभाव, अयोग्यता अथवा अन्य किसी कारण से प्रवेश न देने की स्थिति में शिविर शुल्क लौटा दिया जाता है। स्वीकृति प्राप्त शिविरार्थियों के न आने पर शुल्क लौटाया नहीं जाता है। १०) जो शिविरार्थी आर्थिक कठिनाई के कारण शुल्क देने में असमर्थ होंगे उनके आवेदन करने पर योग्य जानकर शुल्क में आंशिक या पूर्ण छूट दी जा सकती है।
११) पंजीकरण १० दिसम्बर २०२४ तक करवा लेवे। पंजीकरण की स्वीकृति होने पर आपको भेजा जाने वाला शिविर प्रवेश पत्रक साथ में अवश्य लायें। विलम्ब से पंजीकरण कराने वालों को ४०००रु. शिविर शुल्क देना होगा।
१२) बिना स्वीकृति के शिविर में आ जाने वालों को स्थान होने पर ही स्वीकृति दी जाती है. साथ ही उन्हें शिविर शुल्क ३०००रु० के स्थान पर ४०००रु० देना होगा।
१३) शिविरार्थी १७ दिसम्बर को सायंकाल ४ बजे तक शिविर स्थल पर पहुँच जायें। शिविर में अन्तिम दिन तक उपस्थित रहना होता है।
१४) शिविरकाल में शिविर स्थल से बाहर जाकर जिन्हें आर्यवन को देखना हो या अन्यों से मिलना, चर्चा, परामर्श आदि करने हों वे प्रथम दिन ५७ दिसम्बर को सायं ४ बजे से पहले-पहले या अंतिम दिन बजे के बाद कर सकते हैं। यदि आपको अपने घर पर अथवा परिजनों को रोजड़ पहुँचने की सूचना देनी हो तो कृपया पंजीकरण से पहले ही दे देवें।
ध्यान प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर २०२४
आवेदन पत्र











