दम्पती शिविर
४-८ नवम्बर २०२४
वानप्रस्थ साधक आश्रम, आर्यवन, रोजड़ (गुजरात)
दम्पती अर्थात् पति-पत्नी गृहस्थ के आधार होते हैं। पति-पत्नी का परस्पर प्रिय सम्बन्ध पूरे गृहस्थ आश्रम व समीपस्थ परिजनों-मित्रों को सुप्रभावित करता है। पति-पत्नी की परस्पर प्रियता अप्रियता की न्यूनाधिकता उनके परस्पर व्यवहार की कुशलता-अकुशलता पर निर्भर करती है। दोनों का सुख-दुःख इसी पर आश्रित है।
परस्पर प्रियता-सुख-शान्ति का जो स्तर पति-पत्नी चाहते हैं, वह प्रयत्न-पुरुषार्थ के अनुरूप न्यूनाधिक रहता है। न्यूवता को हटाने के लिए उपायों की जिज्ञासा बनी रहती है। यदि आप में ऐसी जिज्ञासा है तो यह शिविर आपके लिए उपयोगी है।
आप इस शिविर में जहां दाम्पत्य जीवन की वैदिक दृष्टि से अवगत होंगे, वहां आपके दाम्पत्य जीवन की समस्याओं का आध्यात्मिक-व्यावहारिक समाधान भी मिल सकेगा। पति-पत्नी के परस्पर सम्बन्धों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण आपसी समन्ध को बढ़ाने में सहायक होगा। आइये एक प्रयास इस दिशा में भी करके गृहस्थ को स्वर्गाश्रम की ओर ले चलें।
शिविर के प्रशिक्षक हैं- मुनि सत्यजित् एवं मुनि ऋतमा। शिविर हेतु ४ नवम्बर को सायं ४ बजे तक पहुँच जाना है। शिविर की समाप्ति८ नवम्बर को अपराह्न ४ बजे तक होगी। आप अनुकूलता से एक दिन आगे-पीछे ३ नवम्बर को आ सकते है व नवम्बर को प्रस्थान कर सकते हैं। संख्या सीमित रहेगी। अपना आवेदन देकर स्वीकृति मिलने पर शिविर शुल्क जमा करा देवें। आवेदन का अंतिम दिन २ नवम्बर है। शिविर शुल्क २०००/- प्रति व्यक्ति है। निवास शुल्क सामूहिक निःशुल्क, पृथक् कक्ष-२००० रहेगा। असमर्थ किन्तु योग्य दम्पती को शिविर शुल्क में छूट दी जा सकती है। शिविर में पति-पत्नी दोनों का आना आवश्यक है, बच्चों को साथ नहीं लाया जा सकता है। मोबाईल आदि संपर्क उपकरणों का प्रयोग निषेध रहेगा, इन्हें कार्यालय में जमा करा देना है।

दिनचर्या
प्रातः ध्यान: ०५:०० से ०५:३०
आसन-प्राणायाम : ०५:४५ से ०६:३०
यज्ञ प्रवचन : ०७:०० से ०८:१०
प्रातराश :
कक्षा : ०६:३० से १०:३० -दाम्पत्य जीवन वैदिक दृष्टि- मुनि सत्यजित्
११:०० से १२:०० – अन्तर्सम्बन्ध की प्रगाढता- मुनि ऋतमा
भोजन : १२:१० से १२:३०
तमेव विश्राम : १२:३० से ०१:३०
कक्षा : ०२:०० से ०३:०० – दाम्पत्य जीवन की समस्यायें व आध्यात्मिक समाधान
मुनि सत्यजित्
०३:३० से ०४:३० – व्यावहारिक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण मुनि ऋतमा
यज्ञ संध्या : ०६:०० से ०७:००
भोजन : ०७:१० से ०७:३०
भ्रमण : ०७:४५ से ०८:००
आत्मनिरीक्षण : ०८:१५ से ०६:१५ – शिविर व गृहस्थ जीवन का मुनि सत्यजित्, मुनि ऋतमा
शयन : १०:०० से ०४:००
मौन : प्रातः जागरण से ७ बजे तक
मध्याह्न – १२:३० से ०१:३०,
रात्रि १०:०० बजे से जागरण तक










