ऋषिराज दयानन्द
ऋषिराज दयानन्द, भारत में इक ज्योति जलाये गये,
सुनो सजनो
ऋषिराज दयानन्द, भारत में इक ज्योति जलाये गये।।
टंकारे में जन्म लिया, शिवरात्रि व्रत धार लिया,
शिव के ऊपर चूहे को लख, शिव से नेह विसार दिया।
सच्चे शंकर की खोज करी, पाखण्ड मिटाय गये।।1।।
सुनो…….
अगर दयानन्द न आते, बुरी तरह हम मिट जाते,
आज हमें जो ज्ञान हुआ है, ऐसा ज्ञान कहाँ पाते?
फैली थीं जितनी कुरीतियाँ, उन पर ध्यान दिलाय गये।।2।।
सुनो…….
वेद बिना हम भटके थे, मत-पंथों में अटके थे,
कुरान, बाइबिल और पुराणों के फन्दों में लटके थे।
सत्यार्थ प्रकाश बना करके, भ्रम-भूत भगाय गये।।3।।
सुनो….
राज्य विदेशी छाया था, देश गुलाम बनाया था,
ऐसी कठिन समस्या में, उस ऋषि ने हमें जगाया था।
नरदेव, देश-आज़ादी का शुभ पाठ पढ़ाय गये।।4।।
सुनो…….
























