इक तेरी दया का दान मिले

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इक तेरी दया का दान मिले

इक तेरी दया का दान

इक तेरी दया का दान मिले,
इक तेरा सहारा मिले जाए।
भव सागर में बहती मेरी,
नैया को किनारा मिल जाए ।।

जीवन की टेढ़ी राहों में,
चलकर ना तुझको जान सका।
आशाओं की झोली भर जाए,
इक तेरा दुवारा मिल जाए।।

मैं दीन हूँ दीनदयाल है तू,
अल्पज्ञ हूँ मैं सर्वज्ञ है तू।
अज्ञान का पर्दा हट जाए,
तेरा उजियाला मिल जाए।।

इस दुर्लभ अवसर को पाकर,
कोई उत्तम कर्म कमा न सका।
अब दिल की तड़प ये कहती है,
कहीं प्रीतम प्यारा मिल जाए।।

अपने मुझको अपना न सके,
औरों को उल्हाना क्यूंकर दूँ।
तू सर्व वरों का दाता है,
वरदान तुम्हारा मिल जाए।।

मैं नर हूँ तू नारायण है,
इतना तो भेद जरूरी है।
यदि शरण मैं तेरी पा न सकूँ,
नर तन तो दुबारा मिल जाए ।।

है विनती एक यही मेरी,
यही एक निवेदन है मेरा।
इस जन्म-मरण के बंधन से
अब तो छुटकारा मिल जाए।।