ओ३म् नाम प्रिय बोल
ओ३म् नाम प्रिय बोल रे तोहे शान्ति मिलेगी ।।
चहुँ दिशि प्रभु की ज्योति निरख ले
ज्ञान-चक्षु को खोल रे तोहे शान्ति मिलेगी ।।
धर्म कर्म की हाट लगा ले
पूरा-पूरा तोल रे तोहे शान्ति मिलेगी ।।
दम्भ, द्वेष, छल, स्वार्थ त्याग दे
प्रेम-प्रीतिरस घोल रे तोहे शान्ति मिलेगी ।।
विषयों में मत खो ‘प्रकाश’ तू मानुष
तन अनमोल रे तोहे शान्ति मिलेगी ।।
























