आर्य समाज प्रवेश-पत्र
शुद्धता, सदाचार एवं संकल्प का पाठ
मैं प्रसन्नतापूर्वक आर्यसमाज के उद्देश्यों को (जैसा कि नियमों में वर्णन किए गए हैं) तथा मंवयों और सिद्धान्तों को (जो वेदों के आधार पर ऋषि दयानन्द के ग्रन्थों में लिखे गए हैं) मानता हूं और उनके अनुकूल सदाचारपूर्वक आचरण स्वीकार करता हूं।
मुझे आर्यसमाज की सदस्यता प्रदान करने की कृपा करें।
अतः कृपया मुझे आर्य समाज की सदस्यता प्रदान करने की कृपा करें।
सदाचार की परिभाषा
‘संध्या आदि नित्यकर्म, शुद्धवृत्ति, वैदिकसंस्कार, पत्नीव्रता व पतिव्रत आदि सदाचार हैं तथा व्यनिचार, मद्यादि मादक द्रव्यों और मांसादि अभक्ष्य पदार्थो का सेवन, जुआ, चोरी, छल-कपट, रिश्वत आदि दुराचार हैं।’
मैंने आर्यसमाज के नियमों तथा सदाचार की परिभाषा की प्रति को प्राप्त कर लिया है। मैं अपने जीवन में इन नियमों को तथा ‘आर्य’ शब्द के अर्थ को भलीभांति धारण करने का संकल्प लेता हूं।

सदस्य का विवरण
नाम : __________________________________________
पता : ___________________________________________
दिनांक : _________________________________________
हस्ताक्षर : _______________________________________
संकल्प
“आओ, दयानन्द के सपनों वाला आर्य समाज बनाएं।”
आचार्य संजय सत्यार्थी
आर्योपदेशक
सत्यार्थ प्रकाश
संपर्क : 7717766151
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