दीन दुःखियों को सताना छोड़ दो छोड़ दो।

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छोड़ दो

(तर्ज-है बहारे बागे दुनियाँ चन्द रोज़)

दीन दुःखियों को सताना छोड़ दो छोड़ दो।
दिल जलों के दिल जलाना छोड़ दो छोड़ दो।
दीन दुःखियों को सतान……

१. कह रहे हैं आज धरती आसमां
बेबसों पर जुल्म ढाना छोड़ दो छोड़ दो।
दीन दुःखियों को सतान………

२. क्या भला है क्या बुरा सोचो ज़रा
बिन विचारे पग उठाना छोड़ दो छोड़ दो।
दीन दुःखियों को सतान……….

३. प्यार अपनों से करो जी जान से
दुश्मनों के गीत गाना छोड़ दो छोड़ दो।
दीन दुःखियों को सताना………

४. कौम के कुछ काम आओ साथियो
वक्त बातों में गंवाना छोड़ दो छोड़ दो।
दीन दुःखियों को सताना……

५. ‘पथिक’ बरसो बन के बादल प्यार के
आग नफ़रत की लगाना छोड़ दो छोड़ दो।
दीन दुःखियों को सताना…….