वैदिक स्वरूप
(तर्ज – ऐ रात के मुसाफ़िर चन्दा जरा बता दे…)
ईश्वर को ढूँढने का वैदिक स्वरूप क्या है।
अनजान है यह दुनियाँ कुछ भी नहीं पता है।
१. तप त्याग भावना से निष्काम कर्म करना
ऊँचे चरित्र वाला इनसान देवता है।
२. जब हो प्रभु से मिलना इच्छा हो दर्शनों की
इस का सही तरीका सन्ध्या उपासना है।
३. अन्तःकरण की शुद्धि करके शरीर निर्मल
उसके समीप जाना ऋषियों का रास्ता है।
४. एकान्त शान्त मन से घर या नदी किनारे
हो उसका जप निरन्तर कण कण में जो बसा है।
५. यम नियम का निभाना कर्त्तव्य नित्य
जानो इस के बगैर कोई मार्ग न दूसरा है।
६. आसन लगा के बैठो व प्राणायाम करना
फिर प्रत्याहार कर के निर्विघ्न धारणा है।
७. तब ध्यान मग्न हो के ऐसी लगे समाधी
यह भी न ‘पथिक’ सूझे संसार चीज़ क्या है।










