मुश्किलों से क्या डरना
(तर्ज- तेरे नाम दी जपाँ मैं माला ओ शेराँ वाली कर किरपा)
हर हाल में प्रभु रखवाला तो मुश्किलों से क्या डरना।
जब आसरा जहाँ से आला तो मुश्किलों से क्या डरना।
१. देखे संगी साथी सारे अपने और पराए।
पर दुनियाँ के मालिक जैसा कोई नज़र न आए।
पल्ला हाथ में उसी का सम्भाला तो मुश्किलों से क्या डरना।
हर हाल में प्रभु रखवाला……
२. जिस ने सृष्टि रचना करके सुन्दर खेल रचाया।
बड़ी अनोखी महिमा उसकी अन्त न जाए पाया।
होवे सर पे जो दीन दयाला तो मुश्किलों से क्या डरना।
हर हाल में प्रभु रखवाला…….
३. जग में और नशे हैं जितने लावें संकट भारी।
तंगी और ग़रीबी अन्दर बीते आयु सारी।
प्रभु नाम का पिया हो प्याला तो मुश्किलों से क्या डरना।
हर हाल में प्रभु रखवाला……..
४. मार्ग में बिखरे हों काँटे चाहे घोर अन्धेरा।
सुन ले ओ मतवाले राही कदम न डोले तेरा।
करे राहों में ‘पथिक’ वो उजाला तो मुश्किलों से क्या डरना।
हर हाल में प्रभु रखवाला……….










