मैं हूँ आत्मा तू परमात्मा
मैं हूँ आत्मा तू परमात्मा
पिता पुत्र का तुम से नाता है।
धरती अम्बर को रचने वाला है
सारे जग का जनक कहलाता है।
मैं हूँ आत्मा तू परमात्मा……
१. मैं हूँ इक देशी तू सर्व व्यापक है।
मैं हूँ विद्यार्थी तू एक अध्यापक है।
आने और जाने का कार्य तो मेरा है।
तू न आता कहीं न जाता है।
मैं हूँ आत्मा तू परमात्मा…….
२. कई कमज़ोरियाँ हैं मुझ में मानता हूँ।
अल्प है बुद्धि मेरी अल्प ही जानता हूँ।
प्रभु सर्वज्ञ है तू। और मर्मज्ञ है तू।
कुल रहस्यों का तू ही ज्ञाता है।
मैं हूँ आत्मा तू परमात्मा…….
३. तूने दुनियाँ में रचा सभी कुछ मेरे लिये।
एक तिनका भी नहीं काम का तेरे लिये।
मैंने जो कर्म किये। तूने पहचान लिये।
मेरे कर्मों का तू फल दाता है।
मैं हूँ आत्मा तू परमात्मा…….
४. तेरी तुलना में कहीं कोई भी चीज़ नहीं।
जहाँ कोई ढूँढता है मिले तत्काल वहीं।
वक्त बरबाद किया। तुम्हें नहीं याद किया।
‘पथिक’ पीछे बड़ा पछताता है।
मैं हूँ आत्मा तू परमात्मा……..










