संसार का उत्पादक ही सुकर्मा

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स इत्स्वा भुवनेष्वास य इमे द्यावापृथ्विी जुजान ।

उ॒र्वी गंभीरे रज॑सी सुमेकै अवंशे धीरः शच्या समेरत्

॥ ऋ. ४.५६.३

तर्जः मर्जी तुमची मोडू नको रे मना

प्रभु है सुकर्मी अधर में रचा संसार, प्रभु सबका आधार॥
नहीं प्रयोजन निज ईश्वर का, जीव हेतु उद्धार
॥ प्रभु सबका आधार॥

सूर्य चन्द्र ग्रह उपग्रह तारों का प्रभु अजय खिलाड़ी
शक्तिमान परमेश्वर ने ही शक्तिरूप गति डाली
ऐसी गति ना डाल सके कोई प्रभु विन सब लाचार
॥ प्रभु सबका आधार ॥

ज्ञान शक्ति और क्रिया स्वाभाविक प्रभु सदा निष्कामी
जनन है उत्तम कर्म प्रभु का निर्माता वो सुजानी
पर उपकार तू सीख प्रभु से, खोल अनुकरण द्वार
॥ प्रभु सबका आधार॥

उत्तम कर्मनिष्ठ ईश्वर ने सृष्टि रची हितकारी
इसी तत्व को हृदयङ्गम कर तदनुसार तैयारी
कर्मशील उत्पन्न कर संतति, बने न वो भूभार
॥ प्रभु सबका आधार ॥

(सुकमा) पवित्र कर्मकर्ता। (हृदयंगम) संगत, मन को जैचा। (अनुकरण)
अनुरुपता, नकल, करना। (भूभार) पृथ्वी पर बोझ। (जनन) पेदा कराना, उत्पत्ति।