महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी

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महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी

महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी
अभय कर दो भगवन्, हूँ तेरा पुजारी
महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी

हँसी व्यङ्ग वाले, कभी मित्र सनकी
सहम जाते हैं, भय से किंचित हम भी
हालाँकि है सत्यकर्म, आस्था हमारी
आ ऽऽऽऽऽ
मगर खुलती अवहेलना की पिटारी
अभय कर दो भगवन्, हूँ तेरा पुजारी
महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी

पराये अनात्मीय, ठग शत्रु चोर
धन-माल-जान की हानि करते घोर
मिले कष्टदु:ख, हम तो सह भी हैं सकते
आ ऽऽऽऽऽ
मगर भय में पाप दुरित पड़ते भारी
अभय कर दो भगवन्, हूँ तेरा पुजारी
महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी

अनात्मिक हिंसक प्राणी हैं शेर-भेड़िए
भयभीत करते हैं, निज स्वार्थ के लिए
मगर हम सतर्क रहें बुद्धि बल से
आ ऽऽऽऽऽ
अभयता की प्रभु प्रार्थना हो हमारी
अभय कर दो भगवन्, हूँ तेरा पुजारी
महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी

ऐ कल्याणकारी ! मेरे प्यारे भगवन्
दो शक्ति आत्मा में, करो दु:ख-भंजन
अभय जागृति में, अभय होवें स्वप्न
हे आत्मन्! शरण प्रभु की है मङ्गलकारी
अभय कर दो भगवन्, हूँ तेरा पुजारी
महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी
अभय कर दो भगवन्, हूँ तेरा पुजारी
महाशक्ति वाले, गुणों के भण्डारी

ओ३म् यो मे॑ राज॒न्युज्यो॑ वा॒ सखा॑ वा॒ स्वप्ने॑ भ॒यं भी॒रवे॒ मह्य॒माह॑ ।
स्ते॒नो वा॒ यो दिप्स॑ति नो॒ वृको॑ वा॒ त्वं तस्मा॑द्वरुण पाह्य॒स्मान् ॥
ऋग्वेद 2/28/10

रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई