प्रभु के गुणों का चिन्तन तन्मयता से करें

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प्रभु के गुणों का चिन्तन तन्मयता से करें

ओ३म् स नो॑ वि॒श्वाहा॑ सु॒क्रतु॑रादि॒त्यः सु॒पथा॑ करत् ।
प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत् ॥
ऋग्वेद 1/25/12

प्रभु के गुणों का चिन्तन
तन्मयता से करें
उत्तम बुद्धि कर्मों के
प्रभु-गुण मनन करें
उसके गुण, कर्म, स्वभाव
अनुकरण करें
प्रभु के गुणों का चिन्तन
तन्मयता से करें

सत्पथ पे चलते हुए
पायें प्रभु की कृपा
दीर्घ जीवन का हमें
अवसर भी देकर रखा
यदि दीर्घ आयु ना हो
सत्कर्म से तरें
उसके गुण, कर्म, स्वभाव
अनुकरण करें
प्रभु के गुणों का चिन्तन
तन्मयता से करें

छोटा सन्मार्ग जीवन
लम्बे कुमार्ग से श्रेष्ठ
ईश्वर तो सङ्ग है सदा
हर साथ उसका है ठेठ
जीवन हो वेद-विहित
सन्मार्ग पर चलें
उसके गुण, कर्म, स्वभाव
अनुकरण करें
प्रभु के गुणों का चिन्तन
तन्मयता से करें

कर दो यह जीवन सफल
हे प्यारे वरद वरुण !
निष्काम कर्म करूँ
पाऊँ दया है करुण !
तेरी शरण मिले तो
जिएँ चाहे मरें
उसके गुण, कर्म, स्वभाव
अनुकरण करें
प्रभु के गुणों का चिन्तन
तन्मयता से करें
उत्तम बुद्धि कर्मों के
प्रभु-गुण मनन करें
उसके गुण, कर्म, स्वभाव
अनुकरण करें
प्रभु के गुणों का चिन्तन
तन्मयता से करें

रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई