विनय मेरी, मेरी भगवन्
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
मेरी उलझन को सुलझाना
मेरी उलझन को सुलझाना
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
रुलाऽनाऽऽऽऽ
रुलाना अपने बिरहा में
हसाना अपने दर्शन में
रुलाना अपने बिरहा में
हसाना अपने दर्शन में
भुलाना भूल सब मेरी (1)
भुलाना भूल सब मेरी (1)
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
चलाना चाल अपनी ही
बताना बात अपनी ही
चलाना चाल अपनी ही
बताना बात अपनी ही
कराना अपनी ही करनी
कराना अपनी ही करनी
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
बिठानाऽऽऽऽ
बिठाना सङ्ग अपने ही
चढ़ाना रङ्ग अपना ही
बिठाना सङ्ग अपने ही
चढ़ाना रङ्ग अपना ही
सुनाना वेद की बन्सी
सुनाना वेद की बन्सी
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
पिलानाऽऽऽऽ
पिलाना अपना सोमामृत
खिलाना जाप गायत्री
पिलाना अपना सोमामृत
खिलाना जाप गायत्री
जलाना वासना सारी
जलाना वासना सारी
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
सुलाना ऽऽऽऽ
सुलाना अपने सिमरन में
जगाना अपनी ज्योति में
सुलाना अपने सिमरन में
जगाना अपनी ज्योति में
लगाना हृदय से अपने
लगाना हृदय से अपने
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
मेरी उलझन को सुलझाना
मेरी उलझन को सुलझाना
मेरा परित्याग ना करना
विनय मेरी, मेरी भगवन्
मेरा परित्याग ना करना
मेरा परित्याग ना करना
मेरा परित्याग ना करनाऽऽऽऽ
भुलाना भूल सब मेरी (1) :–
यहाँ सैद्धांतिक दोष प्रतीत होता है
क्यों की ईश्वर कभी भी किसी के
पाप-पुण्य को भूलते नहीं हैं,
न्यायउचित दण्ड अवश्य देते हैं |
स्वर :- अज्ञात










