शरण अपनी में रख लीजिये

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शरण अपनी में रख लीजिये

शरण अपनी में रख लीजिये
दयामय दास हूँ तेरा
तुम्हें तज कर कहाँ जाऊँ
हितु को* और है मेरा
को*=कौन

भटकता हूँ मैं मुद्दत से
नहीं आराम पाता हूँ
दया की दृष्टि से देखो
नहीं तो डूबता बेड़ा

सताया राग – द्वेषों ने
तपाया तीन – तापों ने
दुखाया जन्म – मृत्यु का
हुआ बेहाल है मेरा

दुखों को मेटने वाला
तुम्हारा नाम सुनकर मैं
शरण में आ गिरा अब तो
भरोसा नाथ है तेरा

शरण अपनी में रख लीजिये
दयामय दास हूँ तेरा
तुम्हें तज कर कहाँ जाऊँ
हितु को* और है मेरा
को*=कौन

स्वर :- पण्डित रमेश जी चन्द्रपाल व श्रीमती जेन्नी जी चन्द्रपाल, आर्य समाज टोरोंटो, वैदिक कल्चर सेंटर