छोड़ इस दुनिया को बन्दे इक दिन जाना है

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छोड़ इस दुनिया को बन्दे इक दिन जाना है

छोड़ इस दुनिया को
बन्दे इक दिन जाना है
तेरी-मेरी मेरी-तेरी का
ये सिर्फ बहाना है

है चीज कौन सी वो
जिसे सङ्ग ले के आया है
मोह ममता ने पगले
तुझको बहकाया है
इस लोभ और लालच को
तूने ना पहचाना है

आया है अकेला जीव
और जाना अकेला है
ये रिश्ते और नाते
सब झूठा झमेला है (1)
दस्तूर ये सृष्टि का
आना और जाना है

ईश्वर ने जन्म दिया
आये परमार्थ में
पर सब कुछ भूल गया
अपने ही स्वार्थ में
कुछ भी तो नहीं तेरा
हर माल बेगाना है

“सुखपाल” सोच जग में
क्या तेरा मेरा है ?? ??? ??
दो पल का बसेरा है
इक हरी नाम अपना (2)
बाकी बेगाना है

रचनाकार :- श्री सुखपाल जी
स्वर :- श्री कोशिन्दर जी खदाना (लोकगायक हरियाणा)