ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
भूरि॒ नाम॒ वन्द॑मानो दधाति
पि॒ता व॑सो॒ यदि॒ तज्जो॒षया॑से ।
कु॒विद्दे॒वस्य॒ सह॑सा चका॒नः
सु॒म्नम॒ग्निर्व॑नते वावृधा॒नः ॥
ऋग्वेद 5/3/10
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
लगे ओ३म् की धुन
मनवा जाये झूम,
कर जोड़ के माँग ले
पूजित धन
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
ओ३म् नाम है श्रेष्ठ तेरा,
अग्निरूप जो दिव्यतम
श्रद्धामय है पूर्ण प्रणति
ब्रह्मानन्द का ऽऽऽऽ,
देना सरस रस आनन्द-अमृत
ओ३म् ही है जीवन-धन
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
प्रेरणामय प्रभु हितैषी,
उन्नति के आयतन
स्नेह बल तेजस्विता के
हैं प्रभु दाता ऽऽऽऽ!!!
जीवन में सुख-शान्ति-नम्रता आनन्द
भर दे प्यारे भगवन्
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
सोम स्वरूप है तेरा निर्मल,
चन्द्र जैसा शीतलतम
ब्रह्मानन्द का निर्झर वर्षक
हे सोम-सुमनाऽऽऽऽऽऽऽ
वर्षा से भीगी तरुवल्लरि सम
कर दे प्रफुल्लित मन
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
तुझसे मिलने आया भगवन्
भाव हृदय के आर्द्रतम
स्नेह भाव हैं इस मन माहीं,
करूँ मैं वन्दना ऽऽऽऽऽऽऽ
अपने ऐश्वर्यों से झोली तू भर दे
धन्य होवे जीवन
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
कह दिया है स्तुत्य हृदय ने
आ प्रभु तेरा स्वागतम्
आके फिर ना जा मेरे ईश्वर/साथी
दे प्रीत प्रेरणा ऽऽऽऽऽऽऽ
प्रीत हृदय की है और नैनों में
भाव भीगे असुवन
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
लगे ओ३म् की धुन
मनवा जाये झूम,
कर जोड़ के माँग ले
पूजित धन
ध्यान प्रभु का कर ले निशदिन
ऐ मेरे मन, ऐ मेरे मन !
रचनाकार :- पूज्य श्री ललित मोहन सहानी जी – मुम्बई
स्वर :- श्रीमती अदिति शेठ
तर्ज :- वार मुगिले वालमी वन्नु मिन्ना नूर मकडिल
शीर्षक :- वन्दना का फल
प्रणति = विनती, नम्रता
हितैषी = हित चाहने वाला
तरुवल्लरि = पेड़ की लताएँ
आर्द्र = भीगा हुआ
आयतन = आश्रय










