परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर

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परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर

ई॒शा वा॒स्य॒मि॒दᳪ सर्वं॒ यत्किं च॒ जग॑त्यां॒ जग॑त् ।
तेन॑ त्य॒क्तेन॑ भुञ्जीथा॒ मा गृ॑ध॒: कस्य॑ स्वि॒द्धन॑म् ।। १ ।।

यजुर्वेद 40/1

परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर
सुख देता करता कल्याण
जड़ चेतन का एक वो स्वामी
कोई ना उसके तुल्य महान्
परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर

सृष्टि और ब्रह्माण्ड को हरसू
करे संचालित नित ईश्वर तू
इक पत्ता ना हिल सके तुझ बिन
हरसू तू विद्यमान दयानिधे !!!
परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर

कर्म अनुसार प्रभु फल देता
भोग मिले निःस्वार्थ उसी का
सुख आनन्द की निर्झर वर्षा
पाये त्यागी महान् दयानिधे !!!
परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर

क्यों ना बनूँ निःस्वार्थी जीवन में
पर धन लालसा जागे ना मन में
जीवन भर सन्तोष का धन रख
पर धन धूल समान दयानिधे !!!
परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर

सुख देता करता कल्याण
जड़ चेतन का एक वो स्वामी
कोई ना उसके तुल्य महान्
परम प्रकाश स्वरूप है ईश्वर

रचनाकर व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई

राग :- पहाड़ी

तर्ज :- गोड तुझ्या त्या स्वप्ना मधुनी