गुजरात से था कौन आया गुजरात से था
तर्ज: उडे़ जब जब जुलफे तेरी
गुजरात से था कौन आया गुजरात से था
कौन आया गुजरात से था कौन आया
गुजरात से था कौन आया।
दयानन्द नाम उनका।।
सारी दुनिया को जिसने जगाया।
दयानन्द नाम उनका।।
गुरू विरजानन्द का चेला।
लाखों में एक अकेला।।
दयानन्द नाम उनका।
वेदों का था जो दीवाना।
सारी दुनिया ने जिनको माना।।
दयानन्द नाम उनका।
कौन आया बनके माली।
छा गई जिनसे हरियाली।।
दयानन्द नाम उनका।
एक आर्य समाज बनाया।
आंधी में दीप जलाया।।
दयानन्द नाम उनका।
रचना:- कंचन कुमार










