आर्यो अब तुम्हे हो गया है क्या
आर्यो अब तुम्हे हो गया है क्या
अपने घर द्वार का कुछ पता ना रहा।। टेक ।।
पड़के आलस की गोदी में टूले हो तुम
क्या था करना तुम्हें, आज क्या कर रहे
जीवनधारा का, कुछ पता ना रहा।।1।।
था अविद्या अंधेरा मिटाना तुम्हें
भूली दुनियां को राह था दिखाना तुम्हे
सो गये हो स्वयं, लक्ष को भूल कर
तुमको संसार का, कुछ पता ना रहा।।2।।
प्रान्तीयता जातियता यहां बढ़ी जा रही
मत मतान्तरों की आंधी चढी आ रही
लूटते हैं विधर्मी, लाल ललना तुम्हारे
अपने परिवार का कुछ पता ना रहा।।3।।
मठ बना कर कहो काम पूरा हुआ
काम पूरा नहीं यह अधूरा हुआ
पद की इच्छाओं में, प्रेमी सब कुछ किया
वेद प्रचार का कुछ पता ना रहा।।4।।










