दुनियां में आकर तूने
दुनियां में आकर तूने,
हीरा जन्म पाकर तूने
विषयों में गवां दिया।। टेक ।।
खेल कूद में बचपन गंवाया तूने,
बचपन गंवाया लक्ष जो था
जिन्दगी का उसको भुलाया
बनाया नहीं शुद्ध मनको,
तूने अपने जीवन धन को
वृथा ही लुटा दिया।।1।।
जवानी बिताई तूने राग रंग में,
राग रंग में धन जीवन में
भरकर उमंग में भंग में
बुढ़ापा पड़ा-भरकर पापों का
घड़ा पानी में डुबा दिया,
व्यर्थ ही गंवा दिया।।2।।
उत्तम जन से नफा उठाकर,
नफा उठाकर कमाने को आया था
घर से लुटा कर बहाकर
आंखों से पानी-बुढ़ापा
बचपन जवानी खाक में
मिला दिया विषयों में गंवा दिया।।3।।
शोभाराम नित्य सन्ध्या हवन कर,
सन्ध्या हवन कर विषयों का
तजन कर ईश भजन कर
बन करके आर्य तू वही कर
कार्य जो ऋषियों ने बता दिया
जो ऋषियों ने बता दिया।।4।।










