आज कुल दुनिया जागी

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आज कुल दुनिया जागी

आज कुल दुनिया जागी
अब तो जाग मेरे देश। टेक।।
वह आज तेरे से आगे हैं
जो कभी तेरे से पीछे थे
वह आज तेरे से ऊंचें हैं
जो कभी तेरे से नीचे थे।


वह तुमको आंखें दिखा रहे
जो डरकर आंखें मीचे थे
एक रोज दई देश तैने
दुनिया को रोटी खाने को
तेरी आस में रहते थे
तड़फे थे दो-दो दाने को
अफसोस आज तू उन्हीं से
मांगे रोटी भूख बुझाने को
टुकड़ों की भी तंगी है
अब तेरे पास क्या शेष है।।1।।

एक गुलामी गई मगर
पांच गुलामी पास तेरे
इसीलिए दिन-दिन बंद
होते जा रहे सुख के स्वास तेरे
मिटें गुलामी पांचों जिस दिन
देश सभी हों दास तेरे
प्रथम गुलामी धार्मिक है
तज धर्म आज बेधर्म बना


पत्थरों पर कहीं कबरों पर सिर
पटक रहा बेशर्म बना ईश्वर को
भूल जड़ वस्तु की पूजा करना
तेरा कर्म बना सिंह सर्प
नदियों वृक्षों की पूजा करै हमेश।।2।।

दूसरी गुलामी मानसिक है,
धीरज की जगह कायरता है
बिल्ली कुत्ते गीदड़ और
मुर्दों से काफी डरता है
निर्भयता त्याग भयभीत
हुआ बुजदिली में समय गुजरता है
तीसरी गुलामी सामाजिक है


भाई-भाई में प्यार नहीं
ग्राम नगर परिवार नहीं
कोई जिसमें है तकरार नहीं
ये आसार है सारहीन सब,
बचने के आसार नहीं
तन में मन में कण-कण में
प्रवेश क्लेश और द्वेष ।।3।।

चौथी गुलामी आर्थिक है
नित बढ़ती जा रही कंगाली
आलस और प्रमाद में
पड़कर सब सम्पत्ति लुटा डाली
दिन रात भूख में तड़फ रहे
तेरे लाखों लाला और लाली
पांचवीं गुलामी शारीरिक
रोगों से भरा विचरता है


कोई आधी कोई चौथाई
आयु के अन्दर मरता है
संयम सदाचार खोकर
दुखियारा हो दुख भरता है
शोभाराम कहै सावधान
होकर सुख में प्रवेश।।4।।