हर कदम आगे धरेंगे ए वतन तेरे लिए।

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हर कदम आगे धरेंगे ए वतन तेरे लिए।

हर कदम आगे धरेंगे ए वतन तेरे लिए।
जिन्दगी कुर्बा करेंगे ए वतन तेरे लिए॥
आखिरी हर श्वांस तक जूझेंगे मंजिल के लिए।
हर हथेली पर लिया है द्रास कारगिल के लिए।
मारेंगे या हम मरेंगे ए वतन तेरे लिए॥1॥

दुश्मनों का सर जमीं से हम मिटा देंगे निशां।
याद वायदा है हमें चाहे भूलजा हिन्दोस्तां ॥
जख्म हर दिल का भरेंगे ए वतन तेरे लिए॥2॥

आज की खातिर ही तो हम माँ की गोदी में पले।
आन को जाने न देंगे जाँ भले जाये चले।
खतरों से हम क्या डरेंगे ए वतन तेरे लिए॥3॥

सर पै बांधा है कफन हमें मादरे हिन्द की कसम।
हर दरिन्दे को ही कर्मठ लेंगे दफना करके दम॥
खून के झरने झरेंगे ए वतन तेरे लिए॥4॥

एक वृद्ध माँ को उसके बेटे के
शहीद होने पर शव लाने वाले
सिपाही का समझाना-