नेहरू को दुवाएं देते हैं
नेहरू को दुवाएं देते हैं,
गाँधी को बुरा नहीं कहते हैं।
हम उस देश के वासी जहाँ
मदिरा के दरिया बहते हैं।
हर नुक्कड़ पर चौराहों पर,
मिलती है गिलासों में भर-भर
जहां लोग भले गाली सुनकर
कानों पर हाथ चलें रखकर ॥
इन्सान के इस पागलपन से
शैतान भी डरकर रहते हैं॥1॥
हम उस देश के वासी जहाँ….
फाके से ही चाहे जीते हैं,
पर जाम नहीं यहां रीते हैं।
बापू तेरे राम से क्या लेना
रावण के कर्म से पीते हैं।
बादल सी शराब बरसती है
घर ढय जायें जिसके ढहते हैं॥2॥
हम उस देश के वासी जहाँ….
हर वक्त नशे में झूमते हैं,
बोतल को दिवाने चूमते हैं।
जब होश को अपने खो देते
बदनाम जगह पर घूमते हैं॥
बदनामी जहालत की आफत
जाने और क्या-2 सहते हैं॥3॥
हम उस देश के वासी जहाँ….
आखिर को सचाई क्यों न कहूं,
नासां होकर चुप कैसे रहूं।
शीशे में जो लाल चमकता है
समझो ये गरीबों का है लहू॥
लहू देकर भी बेबस,
बेकस यहाँ चाँद की मानिन्द गहते हैं।॥4॥
हम उस देश के वासी जहाँ….
गाँधी तेरे चेलों ने यह क्या किया,
भारत को नशे का जहरदिया।
तेरी सच्चाई के ये हत्यारे सर
मौत का ना इल्जाम लिया॥
‘कर्मठ’ हैं ये फांसी के काबिल
जो सारे ही हर्षद महते हैं॥5॥
हम उस देश के वासी जहाँ….










