वतन की आबरू रखलो

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वतन की आबरू रखलो

वतन की आबरू रखलो
वतन के नौजवां हो तुम।
वतन में बढ़ते गद्दारों की ये
समझो कजा हो तुम॥ टेक ॥
वतन के दुश्मन दरिन्दों का
निशां बाकी न रह जाये।
शिवा प्रताप के जौहर की
कामिल दास्तां हो तुम॥1॥

भगत अश्फाक बिस्मिल
राज क्या आजाद रोशनसिंह।
उन्हीं बलिदानियों के खून
का बाकी निशां हो तुम॥2॥

कपिल गौतम व नानक का
चमन किसने उजाड़ा है।
खबर इतनी भी नहीं रखते
हो कैसे राजदां हो तुम॥3॥

बड़ी मुश्किल से आजादी
की दुल्हन को सजाया था।
बचालो लुटती दुल्हन को
वतन के जो कद्रदां हो तुम॥4॥

असम पंजाब क्या कश्मीर
की हालत को देखो तो।
अनाथों उजड़े लोगों की
शक्ल का आईना हो तुम ॥5॥

वतन के रहबरों से कहदो
कर्मठ होश में आयें।
लहू बहता है सड़कों पर
तो कैसे हुक्मरां हो तुम॥6॥