ओम् है जीवन हमारा ओम् प्राणाधार है।

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भजन – ९५

ओम् है जीवन हमारा
ओम् प्राणाधार है।
ओम् है (कर्त्ता-विधाता)
ओम् पालनहार है ।।

ओम् है दुःख का विनाशक
ओम् सर्वानन्द है।
ओम् है बल-तेजधारी
ओम् करुणाकन्द है।

ओम् सबका पूज्य है
हम ओम् का पूजन करें,
ओम् ही के जाप से हम
शुद्ध अपना मन करें ॥

ओम् का गुरुमन्त्र
जपने से रहेगा शुद्ध मन।
बुद्धि दिन-प्रतिदिन
बढ़ेगी धर्म में होगी लगन ॥

ओम् के जप से हमारा
ज्ञान बढ़ता जाएगा।
अन्त में यह ज्ञान हमको
मोक्ष तक पहुँचायेगा ॥