‘अन्तर्यामी स्वामी’ तुमको बारम्बार प्रणाम है।

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‘अन्तर्यामी स्वामी’ तुमको बारम्बार प्रणाम है।

‘अन्तर्यामी स्वामी’ तुमको
बारम्बार प्रणाम है।
तुमने लोक रचाये हैं,
सूर्य-चन्द्र चमकाये हैं,
सन्ध्या की ऊषा में तेरी लीला
ललित ललाम है । अन्तर्यामी०

विद्युत् की गति चंचल में,
वन पर्वत जल में थल में,
अली अवली फूलों फल में,
सघन लताओं में पक्षिगण
गाय रहे गुणगान हैं । अन्तर्यामी०

तू महान् से महान् है,
न कोई तेरे समान है,
वेदों का यह प्रमाण है,
दिया ऋषि ने यह ज्ञान है,
शीतल जगतीतल पर तुमको
सुमरे मिले विश्राम है ।। अन्तर्यामी०