प्रेम प्रभु के सच्चा करके देख जरा इंसान
प्रेम प्रभु के सच्चा
करके देख जरा इंसान,
कितना दयावान् भगवान् ।
दयानिधि वह दया का सागर,
खोजा उसकी शरण में जाकर।
सच्चे दिल से माँग ले उससे,
जो चाहे वरदान।
कितना दयावान् भगवान्
अन्तर्यामी घट-घट वासी,
वो ही मक्का वो ही काशी।
पत्ते-पत्ते में रमा हुआ,
करके देख पहचान।
कितना दयावान् भगवान्
निराकार अपार है वो ही,
गावत वेद ग्रन्थ सब ही।
यह संसार उसी की प्रतिमा,
उसी का रूप महान्।
कितना दयावान् भगवान्










