तूने अपनी अनुपम माया से जग-ज्योति जगाई है।

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तूने अपनी अनुपम माया से जग-ज्योति जगाई है।

तूने अपनी अनुपम माया से
जग-ज्योति जगाई है।
मनुज और पशुओं को रचकर
निज महिमा प्रगटाई है ॥

अपने हिय-सिंहासन पर
श्रद्धा से तुझे बिठाते हैं।
भक्ति भाव से भेंटें लेकर
तब चरणों में आते हैं।