क्यों नहीं दुखड़े मिटाता
क्यों नहीं दुखड़े मिटाता और दशा
बिगड़ी बनाता ऐ मेरे भगवान्
तू ही सब से है बड़ा।
बेबसों का आसरा सर्वशक्तिमान्
क्यों नहीं दुखड़े मिटाता और दशा……
ऐ मेरे भगवान……
हाथ भी जकड़े हुए हैं पाओं में हैं बेड़ियाँ।
सूझता कुछ भी नहीं है जाएँ तो जाएँ कहाँ।
कब तलक दुखड़े सहेंगे कैदखाने में यहाँ।
ऐ मेरे भगवान् ।
क्यों नहीं दुखड़े मिटाता और दशा…
ऐ मेरे भगवान……
सात बच्चे दे चुके हैं निर्दयी के हाथ हम ।
मानते हैं तुम को केवल एक दीनानाथ हम।
कौन है तेरे सिवा अब जिसका माँगें साथ हम।
ऐ मेरे भगवान् ।
क्यों नहीं दुखड़े मिटाता और दशा…
ऐ मेरे भगवान…….
जुल्म की हद हो चुकी है पाप बढ़ता जा रहा।
हर तरफ़ मजबूरियाँ हैं दिल “पथिक” घबरा रहा।
कंस है ज्वालामुखी जो आग ही बरसा रहा।
ऐ मेरे भगवान् ।
क्यों नहीं दुखड़े मिटाता और दशा….
ऐ मेरे भगवान……










