समझ मनवा होऽऽ जग में प्रभु की माया

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समझ मनवा होऽऽ जग में प्रभु की माया

तर्ज: रसिक बलमा

समझ मनवा होऽऽ जग में प्रभु की माया
जिसने प्रभु को रिझाया उसने प्रभु को है पाया ॥ समझ ॥

प्रभु है अनन्त अनादि अनुपम अभय अविनाशी
दर्शन के हम अभिलाषी हो 5(2)
पावन कृपा की छाया…. ॥ समझ ॥

निराकार न्यायकारी, शक्तिमान है हितकारी
लिख लिख के दुनियाँ हारी हो (2)
भेद तेरा ना पाया… ॥ समझ ॥

सच्चिदानन्द सुखकारी दयालू परोपकारी
सृष्टि बनाई न्यारी, हो ऽऽऽ हो 555
वेदों ने तुझको गाया…. ॥ समझा ॥

निर्विकार अन्तर्मायी अजन्मा कृपालु स्वामी
पाते तुझे मुनि ध्यानी हो होऽऽऽ हो 555
तुझे सर्वव्यापक पाया…. ॥ समझा ॥

है आधार सबका ईश्वर, तू नित्य रहे जगदीश्वर
तूने ही मन के भीतर होऽऽऽ(2)
ज्योर्तिमय रूप दिखाया…. ॥ समझा