प्यारा देश हमारा, प्यारा देश हमारा ।
प्यारा देश हमारा
प्यारा देश हमारा ।
इसके बराबर और न कोई,
कुल दुनियां से न्यारा ।।
यहां हिमालय की चोटी,
नभ से करती है बातें
सदा सुनहरे दिन होते हैं,
चांदी जैसी रातें।
गंगा यमुना जैसी नदियां,
निर्मल नीर बहायें
खेतों में हरियाली नाचे,
बहती मधुर हवायें ।।
यह ऋषियों-मुनियों की धरती,
नमन करे जग सारा
मिट जाये अज्ञान-अंधेरा,
वेद ज्ञान के द्वारा गौतम,
कपिल, कणाद, पतंजलि, जैमिनी
व्यास गुरु हैं पांच महायज्ञों को करके,
होते काम शुरू हैं।।
इक्ष्वाकु पृथु ने पृथ्वी पर,
इसका यश फैलाया
और ययाति अम्बरीश ने,
अम्बर तक पहुंचाया
हरिश्चन्द्र मुचुकुन्द शिवि ने,
गाई गौरव गाथा ऋषभ
मान्धाता ने इसका,
किया है ऊंचा माथा ।।
भक्त कबीर व गुरु नानक से,
सच्चे सन्त हुए हैं।
चन्द्रगुप्त, विक्रमादित्य
जैसे श्रीमन्त हुये हैं।।
शंकर और दयानन्द
जैसे वीतराग संन्यासी।
“पथिक” हुये जिनके वचनों
से गद्गद् भारतवासी ।।










